छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप में दो असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड

एनसीआर:, रविंद्र भाटी

पीएचडी छात्रा से छेड़छाड़ के आरोप में दो असिस्टेंट प्रोफेसर सस्पेंड…
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) प्रशासन ने महिला सुरक्षा और नैतिक मूल्यों के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Biotechnology Department) के दो असिस्टेंट प्रोफेसरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। पीएचडी छात्रा द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के गंभीर आरोपों के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की है।क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जैव प्रौद्योगिकी विभाग की एक पीएचडी छात्रा ने कॉलेज के डीन को लिखित शिकायत सौंपी थी, जिसमें असिस्टेंट प्रोफेसर अजीव सांगवान और नवीन कौशिक पर छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। छात्रा की शिकायत की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने वीरवार को दोनों वैज्ञानिकों के निलंबन आदेश जारी कर दिए।निष्पक्ष जांच के लिए कमेटी गठित
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि संस्थान में किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाती है। प्रशासन ने मामले की तह तक जाने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि यह निलंबन जांच को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए किया गया है ताकि आरोपी अपने पद का प्रभाव जांच प्रक्रिया पर न डाल सकें।

जांच के मुख्य बिंदु (Scope of Investigation):
जांच समिति साक्ष्यों के आधार पर निम्नलिखित पहलुओं की पड़ताल करेगी:

डिजिटल और भौतिक साक्ष्य: घटना के समय और स्थान की पुष्टि के लिए सीसीटीवी फुटेज और अटेंडेंस रजिस्टर की जांच की जाएगी।

अकादमिक दबाव की जांच: क्या प्रोफेसरों ने रिसर्च कार्य या पीएचडी थीसिस को लेकर छात्रा पर कोई मानसिक दबाव बनाया या डराने की कोशिश की?

पिछला ट्रैक रिकॉर्ड: आरोपियों के पूर्व आचरण की समीक्षा की जाएगी और सहकर्मियों व लैब सहायकों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

तकनीकी साक्ष्य: व्हाट्सएप चैट्स, ईमेल और कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाला जाएगा ताकि ‘हैरसमेंट’ के दावों की पुष्टि की जा सके।

पद का दुरुपयोग: क्या प्रोफेसरों ने अपनी शैक्षणिक स्थिति का लाभ उठाकर छात्रा को अनुचित प्रलोभन या नुकसान पहुंचाने की धमकी दी?

विश्वविद्यालय का पक्ष
HAU प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो आरोपियों के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल, इस कार्रवाई ने विश्वविद्यालय परिसर में अन्य कर्मचारियों और शोधार्थियों के बीच कड़ा संदेश दिया है।

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