मेडिकल कॉलेज में पानी की टंकी में मरे मिले तीन बंदर

 

NCR Digital Channel:लंबे समय से गंदा पानी हो रहा था कर्मचारियों को सप्लाई

एनसीआर डिजिटल चैनल रविंद्र भाटी

नूंह के मेडिकल कॉलेज नल्हड़ में लापरवाही का ऐसा सच सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बने रिहायशी परिसर की पानी की टंकियों में एक नहीं, बल्कि तीन-तीन मृत बंदर मिलने से बुधवार को पूरे मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बंदरों की हालत देखकर अंदाजा लगाया गया कि वे चार से पांच दिन पहले ही टंकी में मर चुके थे, यानी इतने दिनों से स्टाफ उसी दूषित पानी का इस्तेमाल कर रहा था। मामला मेडिकल कॉलेज की रिहायशी इमारत ईडब्ल्यूएस-1, 2 और 3 का है, जहां मंगलवार को रहने वाले कर्मचारियों को पानी से तेज बदबू आने लगी। पहले तो लोगों ने इसे सामान्य गंदगी समझा, लेकिन जब शिकायत के बाद कर्मचारियों ने टंकी की जांच की तो सबके होश उड़ गए। एक टंकी के अंदर एक बंदर मृत पड़ा मिला।
इसके बाद बुधवार को जब बाकी टंकियों की सफाई और जांच शुरू हुई, तो हालात और भयावह निकले। दूसरी टंकी में दो और बंदरों के शव बरामद हुए। टंकियों में जमा सड़ी गंदगी और बदबू ने साफ कर दिया कि सफाई व्यवस्था लंबे समय से भगवान भरोसे चल रही थी। रिहायशी स्टाफ का आरोप है कि इन पानी की टंकियों की सालों-साल सफाई नहीं कराई जाती। ऊपर से बंदरों का आतंक इतना ज्यादा है कि वे टंकियों के ढक्कन तोड़ देते हैं, जिससे धूल-मिट्टी, कचरा और जानवरों की गंदगी लगातार पानी में गिरती रहती है।
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पीने समेत अन्य रोजमर्रा के कामों में होता रहा प्रयोग :

यही नहीं, लोग इसी पानी का इस्तेमाल पीने, नहाने, खाना बनाने, दूध और सब्जियां धोने, बर्तन और कपड़े साफ करने जैसे रोजमर्रा के हर काम में करते रहे। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अगर यह गंदा पानी लंबे समय तक इस्तेमाल होता रहा, तो इससे स्टाफ और उनके परिवारों की सेहत पर कितना बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
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वर्जन

यह गलती कहां हुई, इसकी जांच कराई जा रही है। उन्होंने माना कि परिसर में बंदरों का उत्पात काफी ज्यादा है, इसलिए अब टंकियों पर लोहे के मजबूत ढक्कन और जाल लगवाए जाएंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की शर्मनाक स्थिति दोबारा न बने।
डॉ. मुकेश कुमार, निदेशक, मेडिकल कॉलेज

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