दुल्हन के घर में कदम रखते ही आई हादसे की खबर
एनसीआर डिजिटल चैनल रविंद्र भाटी
यूनुस ने अधिक बरातियों के लिए रात में निकाह तय किया। बरात लौटते समय बस दुर्घटनाग्रस्त हुई, जिसमें यूनुस समेत कई की जान गई। परिवारों में मातम छाया है
फैसले का अफसोस यूनुस के परिवार को अब जिंदगी भर रहेगा। अगर यूनुस अपने समधी की बात मान लेते तो शायद हादसा होने से बच जाता। समधी ने दिन में निकाह करने की सलाह दी थी, लेकिन यूनुस ने अपने लोग अधिक से अधिक बरात में पहुंचें, यह सोचकर रात का समय तय किया। सोमवार को पोस्टमार्टम हाउस में रिश्तेदारों के साथ गमगीन खड़े यूनुस के पुत्र व दूल्हा जाहिद उस मनहूस घड़ी को कोस रहे थे।
जाहिद उनके ससुर शेरू कुरैशी नहीं चाहते थे कि निकाह रात में हो, लेकिन पिता यूनुस ने उनके सामने यह तर्क दिया कि बरात में शामिल होने वाले अधिकतर लोग मजदूरी करने वाले हैं। किसी का नुकसान न हो और अधिक से अधिक लोग निकाह में शामिल हो सकें, इसके लिए उन्होंने शेरू कुरैशी से रात में निकाह की पेशकश की
यूनुस की जिद पर समधी ने उनकी पेशकश को स्वीकार कर लिया। रविवार रात करीब साढ़े 10 बजे निकाह की सभी रस्में पूरी हो गई थीं। इसके बाद बरातियों ने लौटना शुरू कर दिया था। कुछ लोग कारों और कुछ बाइकों से लौटे। यूनुस अपने कुछ करीबियों के साथ समारोह पूरी तरह समाप्त होने के बाद मिनी बस में लौट रहे थे। बस में सवार अधिकतर लोग फल और सब्जी का काम करने वाले थे। हादसे के बाद पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद लोग कह रहे थे कि काश यूनुस दिन में ही निकाह तय कर देते।दुल्हन के घर में कदम रखते ही आई हादसे की खबर
जाहिद अपनी दुल्हन को लेकर कार से डासना के लिए निकले थे। रात करीब डेढ़ बजे जैसे ही वे दुल्हन को लेकर घर पहुंचे तो बधाइयों और स्वागत का दौर शुरू हो गया। इसी बीच जाहिद के पास हादसे की सूचना आई और खुशी का माहौल मातम में बदल गया। जाहिद के साथ घर में मौजूद रिश्तेदार उल्टे पांव घटनास्थल की ओर ओर रवाना हो गए।17 अप्रैल को है जाहिद की बहन का निकाह
चार भाइयों और पांच बहनों में जाहिद दूसरे नंबर का है। जाहिद के निकाह के तुरंत बाद 17 अप्रैल को उसकी बहन मंतशा का निकाह तय है। उसका रिश्ता बुलंदशहर के गांव शेरपुर निवासी युवक से तय हुआ है, लेकिन अब परिवार में मातम छाया हुआ है। परिवार में बड़े भाई शाहिद और जाहिद का ही निकाह हुआ है। बाकी भाई-बहन अभी अविवाहित हैं।एक जनवरी 2027 तक था बस का परमिट, दस्तावेजों में नहीं मिली कमी
निजी बस का रजिस्ट्रेशन गाजियाबाद से हुआ है। हादसे के बाद प्रशासन की ओर से बस और ट्रक के दस्तावेजों की जांच कराई गई। बस का परमिट एक जनवरी 2027 तक है। ट्रक के दस्तावेजों में भी किसी प्रकार की कमी नहीं पाई गई। बस के चालक को लेकर पुलिस संशय की स्थिति में है। पुलिस का मानना है कि अशोक बस चला रहा होगा, क्योंकि बस में अशोक के अलावा कोई चालक नहीं था। अशोक के परिजनों का कहना है कि वह बस पर परिचालक के रूप में कार्य करते थे। इस संबंध में पुलिस बस के मालिक से पूछताछ करेगी। ट्रक का चालक फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसे तलाश रही है।



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