जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर से कमजोर बच्चों की पढ़ाई और गतिविधियों पर संकट गहराया

एनसीआर डिजिटल चैनल रविंद्र भाटी

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर से कमजोर बच्चों की पढ़ाई और बाहरी गतिविधियों पर संकट गहराया

नई दिल्ली, 22 अप्रैल, 2026: जलवायु परिवर्तन माता-पिता के संरक्षण से वंचित बच्चों के लिए असमानता की खाई को और चौड़ा कर रहा है, क्योंकि यह उनकी स्थिरता और अवसरों को छीन रहा है, जिससे उनकी शिक्षा और बाहरी गतिविधियों में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। अत्यधिक तापमान और अनिश्चित मौसम उनके दैनिक जीवन को बाधित करते हैं, जिससे पहले से ही जोखिम में रह रहे बच्चे सुरक्षित वातावरण के नुकसान के प्रति और अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, यह कहना है श्री सुमंत कर, सीईओ, एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस इंडिया का।
एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस इंडिया ने हीटवेव और अनिश्चित वर्षा में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जो सीधे तौर पर बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक कल्याण को प्रभावित करती है। ये प्राकृतिक आपदाएँ उनके सुरक्षित “खेल के समय” को कम कर देती हैं, जो उनके सामाजिक विकास और मित्रता निर्माण के लिए आवश्यक है। सबसे तात्कालिक चुनौती अत्यधिक गर्मी और मौसम में बदलाव के कारण “समग्र विकास” में उत्पन्न व्यवधान है। बच्चे बाहरी गतिविधियों, खेलों और शैक्षणिक भ्रमण से वंचित हो रहे हैं, जो कक्षा के बाहर उनके विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
श्री सुमंत कर, सीईओ, एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस इंडिया कहते हैं, “पर्यावरणीय अस्थिरता के कारण अत्यधिक गर्मी या बाढ़ के दौरान स्कूल बार-बार बंद होते हैं, जिससे शैक्षणिक प्रगति सीधे प्रभावित होती है। शारीरिक और भावनात्मक रूप से, स्थिर बाहरी वातावरण की कमी बच्चों को आवश्यक सामाजिक और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकती है। जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर का खतरा नहीं है; यह एक वर्तमान वास्तविकता है, जो आज हमारे बीच सबसे कमजोर वर्ग को प्रभावित कर रही है। हमें अब कार्रवाई करनी होगी ताकि हम बच्चों के प्रति अपनी जिम्मेदारी पूरी कर सकें और उन्हें वह सुरक्षित, स्वस्थ ग्रह दे सकें, जिसके वे उत्तराधिकारी हैं।”
एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस अपने संचालन में सौर पैनल, वर्षा जल संचयन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के माध्यम से स्थिरता को समाहित करता है। जल एटीएम और ईकोब्रिक्स जैसे व्यावहारिक समाधान उन समुदायों में लागू किए जाते हैं, जहाँ वे कार्य करते हैं, ताकि अपशिष्ट प्रबंधन और संसाधनों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस के अंतर्गत बच्चों को पर्यावरण विज्ञान में औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, ताकि दीर्घकालिक विशेषज्ञता विकसित की जा सके। गाँव के दैनिक जीवन में वृक्षारोपण अभियानों में सक्रिय भागीदारी और जल, वायु तथा वन संसाधनों के इष्टतम उपयोग के बारे में सीखना भी शामिल है।

इस वर्ष की थीम, “Our Power, Our Planet,” दोहरी जिम्मेदारी को दर्शाती है। बड़ों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे बच्चों को वह सुरक्षित ग्रह सौंपें, जिसके वे अधिकार रखते हैं, जबकि बच्चों को इसे संरक्षित करने में अपनी जिम्मेदारियों को समझने के लिए सशक्त बनाया जाता है। यह इस बात को मान्यता देने के बारे में है कि यह ग्रह उनकी विरासत है।
हालाँकि सरकारी और गैर-सरकारी प्रयासों के माध्यम से पहल की जा रही है, लेकिन कमी इस समझ में है कि यह एक वैश्विक आंदोलन है। जलवायु जोखिमों से विशेष रूप से प्रभावित बच्चों की पहचान और समर्थन के लिए सुदृढ़ रिपोर्टिंग और प्रतिक्रिया तंत्र स्थापित करने की आवश्यकता है। सहयोग का फोकस तत्काल संकट तैयारी और विस्थापित या प्रभावित युवाओं के लिए दीर्घकालिक सुधारात्मक समाधानों दोनों पर होना चाहिए। आगे देखते हुए, प्राथमिकता सभी स्थानों पर जलवायु तैयारी को संस्थागत रूप देना है, ताकि बच्चों को आपदाओं से सुरक्षित रखा जा सके, साथ ही हरित बुनियादी ढांचे का विस्तार जारी रखा जा सके। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपने ग्रह की रक्षा करें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और बेहतर भविष्य प्रदान किया जा सके।

About SOS Children’s Villages India
1964 में स्थापित, एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस इंडिया उन बच्चों को, जो माता-पिता के संरक्षण से वंचित हैं या इसे खोने के जोखिम में हैं, गुणवत्तापूर्ण देखभाल सेवाओं की एक वैल्यू चेन प्रदान करता है, जो केवल बाल देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि समग्र बाल विकास सुनिश्चित करती है।
हमारी अनुकूलित देखभाल पहलें, जैसे फैमिली लाइक केयर, फैमिली स्ट्रेंथनिंग, किनशिप केयर, शॉर्ट स्टे होम्स, फोस्टर केयर, यूथ स्किलिंग, इमरजेंसी चाइल्डकेयर और स्पेशल नीड्स चाइल्डकेयर, जीवन में बदलाव लाने और हमारी देखरेख में रहने वाले बच्चों को आत्मनिर्भर तथा समाज के योगदानकारी सदस्य बनाने के उद्देश्य से संचालित की जाती हैं। यह संगठन समुदायों में कमजोर परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए सशक्त करता है, जिससे वे अपनी देखरेख में रहने वाले बच्चों के लिए सुरक्षित और पोषणयुक्त वातावरण तैयार कर सकें। आज, 22 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्थित 32 एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस इंडिया के अंतर्गत 440 से अधिक पारिवारिक घरों में 6,500 से अधिक बच्चे रह रहे हैं, जो श्रीनगर से कोचीन और भुज से शिलॉन्ग तक फैले हुए हैं। उनकी देखभाल और परवरिश एसओएस मदर्स और आंट्स द्वारा स्नेहपूर्वक की जाती है।
भारत के सबसे व्यापक स्व-कार्यान्वित बाल देखभाल गैर-सरकारी संगठनों में से एक के रूप में, एसओएस चिल्ड्रन्स विलेजेस इंडिया हर वर्ष 45,000 से अधिक बच्चों को सशक्त बनाता है और 70,000 से अधिक जीवनों पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।

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